छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: रामगोपाल अग्रवाल की ₹9.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, ED ने दाखिल की पूरक शिकायत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और कार्रवाई की है। एजेंसी ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ विशेष न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। इससे पहले 8 अक्टूबर 2026 को रायपुर स्थित उनकी दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया था। इन संपत्तियों का मूल्य लगभग 9.06 करोड़ रुपये बताया गया है।

ED की जांच में सामने आए कई आरोप

प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी।

एजेंसी की जांच में वर्ष 2019 से 2023 के दौरान कथित शराब सिंडिकेट के जरिए अवैध कमाई किए जाने का आरोप सामने आया है। ED के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित आय का आंकड़ा 2,883 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।

जांच एजेंसी कथित अवैध कमाई के स्रोत, उसके लेन-देन और इससे लाभान्वित हुए लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

दो संपत्तियों पर अस्थायी कुर्की की कार्रवाई

ED ने 8 अक्टूबर 2026 को रामगोपाल अग्रवाल से संबंधित रायपुर की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया। इनकी कुल कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है।

धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों को जांच के दौरान सुरक्षित रखना है। अस्थायी कुर्की अपने आप में संपत्ति के अवैध होने पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं है।

न्यायालय में दाखिल की गई पूरक अभियोजन शिकायत

ED ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। एजेंसी के अनुसार, अग्रवाल को इस मामले में 11 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वह न्यायिक हिरासत में हैं।

पूरक अभियोजन शिकायत के माध्यम से जांच एजेंसी मामले से जुड़े अतिरिक्त आरोपों और साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखती है। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

जांच जारी, आरोपों पर न्यायालय का फैसला अहम

छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य में चल रही प्रमुख वित्तीय जांचों में शामिल है। ED इस मामले में कथित धन शोधन और अपराध से अर्जित संपत्तियों की पड़ताल कर रही है।

हालांकि, जांच एजेंसी के आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में संबंधित व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।