शराब घोटाला: चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, ED और राज्य सरकार की याचिकाएं खारिज

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी। अदालत के इस फैसले के साथ चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रहेगी।

हाई कोर्ट की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि हाई कोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश में राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के खिलाफ की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने (Expunge) का निर्देश दिया।

हाई कोर्ट ने किन आधारों पर दी थी जमानत?

इससे पहले 2 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने चैतन्य बघेल को ED और ACB/EOW से जुड़े मामलों में जमानत प्रदान की थी। अदालत ने कहा था कि मामले के कई अन्य प्रमुख आरोपी पहले ही जमानत पर हैं। ऐसे में समानता (Parity) के सिद्धांत को देखते हुए चैतन्य बघेल को भी राहत मिलनी चाहिए। हाई कोर्ट ने यह भी माना था कि जांच का अधिकांश आधार दस्तावेजी साक्ष्य हैं और इनकी सत्यता का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

प्रवर्तन निदेशालय और राज्य की जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में कथित शराब सिंडिकेट के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में चैतन्य बघेल की भी भूमिका रही है। वहीं, चैतन्य बघेल और कांग्रेस शुरू से इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए खारिज करते रहे हैं।

ट्रायल जारी रहेगा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चैतन्य बघेल की जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी। हालांकि, यह आदेश मामले के गुण-दोष (Merits) पर अंतिम फैसला नहीं है। कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई निचली अदालत में पहले की तरह जारी रहेगी और आरोपों पर अंतिम निर्णय ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा।