20 फीट ऊपर लोहे की सीढ़ी और नीचे उफनती पैरी नदी… गरियाबंद में जान जोखिम में डाल स्कूल पहुंच रहे बच्चे

गरियाबंद/रायपुर, 3 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर पुल का निर्माण अधूरा होने के कारण स्कूली बच्चों समेत ग्रामीणों को बारिश के मौसम में बेहद जोखिम भरे रास्ते से आवाजाही करनी पड़ रही है।

लगातार बारिश के कारण पैरी नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में बच्चों को निर्माणाधीन पुल के पिलर पर लगी लोहे की सीढ़ी और अधूरे हिस्से के सहारे आवागमन करते हुए देखा गया है। नीचे नदी का तेज बहाव और ऊपर अस्थायी रास्ता—यह स्थिति किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रही है।

वर्षों से अधूरा पड़ा है पुल

स्थानीय लोगों और सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार देहारगुड़ा-खामभाठा के बीच पैरी नदी पर बनने वाला पुल लंबे समय से अधूरा पड़ा है। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है।

सबसे ज्यादा चिंता स्कूली बच्चों की आवाजाही को लेकर है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माणाधीन पुल के जोखिम भरे हिस्से का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

बारिश बढ़ी तो खतरा भी बढ़ेगा

मैनपुर क्षेत्र में मानसून के दौरान पैरी नदी में पानी बढ़ने के साथ ही इस रास्ते पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है। तेज बहाव की स्थिति में पुल के निर्माणाधीन हिस्से से आवाजाही करना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल का निर्माण पूरा होने से क्षेत्र के कई गांवों को आवागमन में बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में

मामला मीडिया के जरिए सामने आने के बाद गरियाबंद जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर गया है। रिपोर्टों के अनुसार कलेक्टर ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुल का निर्माण कब तक पूरा होगा और तब तक बच्चों एवं ग्रामीणों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन क्या वैकल्पिक व्यवस्था करेगा?

बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

बारिश के दौरान नदी और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में निर्माणाधीन पुल के पिलर और लोहे की सीढ़ी के सहारे बच्चों की आवाजाही को सामान्य स्थिति नहीं माना जा सकता।

प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती यह है कि पुल का काम पूरा होने तक बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी अप्रिय घटना की स्थिति पैदा न हो।