सरकार ने ड्रग नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर शिकंजा कसने के लिए संपत्तियों की वित्तीय जांच भी शुरू की है। कार्रवाई SAFEMA और NDPS Act के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी पर निगरानी के लिए Anti-Narcotics Task Force (ANTF) का गठन किया है और 10 जिलों में इसके लिए 100 नए पदों को मंजूरी दी गई है।
चार महीनों में 399 मामले, 679 गिरफ्तारियां
गृह मंत्री के अनुसार, हाल के चार महीनों में प्रदेश में ड्रग तस्करी से जुड़े 399 मामले दर्ज किए गए और 679 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुलिस ने 6,791 किलो गांजा, 98,231 साइकोट्रॉपिक टैबलेट/इंजेक्शन और 512.88 किलो डोडा समेत अन्य मादक पदार्थ जब्त किए।
वहीं, 2025 में 1,288 मामलों में 2,342 गिरफ्तारियां दर्ज हुई थीं। 31 जनवरी 2026 तक इस साल 146 मामले और 257 गिरफ्तारियां दर्ज किए जाने की जानकारी विधानसभा में दी गई।
सरकार का दावा—सप्लाई और डिमांड दोनों पर कार्रवाई
सरकार का कहना है कि ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए केवल तस्करों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक गतिविधियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा स्कूल-कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तथा नशामुक्ति से जुड़े कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ड्रग से संबंधित सूचना देने के लिए 1933 टोल-फ्री नंबर के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक अजय चंद्राकर ने प्रदेश में नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई, जबकि गृह मंत्री ने सरकार की कार्रवाई को प्रभावी बताते हुए आगे भी अभियान जारी रखने की बात कही।
