नेपाल में कुदरत का कहर: भीषण बाढ़ ने मचाई तबाही, 700 से ज्यादा लोगों की मौत; राहत-बचाव अभियान जारी

काठमांडू, 30 अगस्त 2026। नेपाल में बीते दिनों आई विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के बाद देश के कई हिस्सों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब तक सामने आए विभिन्न अपडेट्स के मुताबिक, मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

भारी बारिश के बाद नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का असर विशेष रूप से गंभीर रहा। तेज बहाव में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया। बाढ़ की चपेट में आने से बड़ी संख्या में घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज

बाढ़ के बाद नेपाली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत भी नेपाल के राहत अभियान में मदद कर रहा है। भारत की ओर से राहत सामग्री और विशेष तकनीकी टीमों को नेपाल भेजा गया है। 68.5 टन राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। रविवार को राहत सामग्री लेकर भारत की चौथी उड़ान भी काठमांडू पहुंची।

विदेशी नागरिक भी हुए प्रभावित

नेपाल में आई इस आपदा से स्थानीय आबादी के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी प्रभावित हुए हैं। कई पर्यटक बाढ़ के कारण रास्तों में फंस गए थे। भारत सरकार और नेपाली प्रशासन की मदद से प्रभावित भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

बाढ़ ने खोल दी आपदा प्रबंधन की चुनौती

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के पर्वतीय और नदी घाटी वाले क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ से निपटने की चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है। कई जगह सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों की तलाश, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना है। आने वाले दिनों में मौसम और नदी के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।