रायपुर, 28 जुलाई 2026। बस्तर वन मंडल में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अब थर्मल इमेजिंग ड्रोन की मदद से हाई-टेक निगरानी शुरू कर दी गई है. इस आधुनिक तकनीक के जरिए रात के अंधेरे में भी वन्यजीवों की गतिविधियों, अवैध कटाई, लकड़ी तस्करी और शिकार जैसी घटनाओं पर प्रभावी नजर रखी जा रही है.
हाल ही में माचकोट और बिलोरी के जंगलों में किसी अज्ञात वन्यप्राणी के पंजों के निशान मिलने के बाद वन विभाग ने सुरक्षा और तलाश अभियान के लिए थर्मल ड्रोन तैनात किए हैं. यह ड्रोन शरीर की गर्मी (हीट सिग्नेचर) के आधार पर घने जंगलों और अंधेरे में भी जानवरों तथा संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम हैं.
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर बस्तर वन मंडल, कांकेर वन मंडल के सहयोग से इस तकनीक का उपयोग कर रहा है. विभाग के अनुसार जल्द ही बस्तर वन मंडल को अपना थर्मल ड्रोन भी उपलब्ध कराया जाएगा.
वन विभाग इस तकनीक का उपयोग मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी कर रहा है. हाथियों या अन्य जंगली जानवरों के गांवों के आसपास पहुंचने की सूचना मिलने पर ड्रोन से उनकी लोकेशन का पता लगाकर ग्रामीणों को समय पर सतर्क किया जाता है. वहीं, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती है.
डीएफओ उत्तम गुप्ता ने बताया कि थर्मल ड्रोन के इस्तेमाल से रात्रिकालीन गश्त अधिक प्रभावी हुई है और बस्तर की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के साथ वन अपराधों पर नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण मदद मिल रही है.
