RBI के फैसले से कर्ज महंगा होने की संभावना, FY27 में 7.1% GDP ग्रोथ का अनुमान
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट अब 5.50 प्रतिशत हो गया है। करीब चार साल बाद केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी की है।
RBI का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है और महंगाई तथा कच्चे तेल की कीमतों को लेकर दबाव बना हुआ है। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य आर्थिक विकास को बनाए रखने के साथ-साथ महंगाई पर नियंत्रण रखना है।
क्या हुआ बदलाव?
RBI ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की है। रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्प अवधि के लिए धन उपलब्ध कराता है। इसमें बदलाव का सीधा असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ सकता है।
बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव होने पर नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के साथ-साथ कुछ मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन लेने वालों पर भी असर पड़ सकता है। खासकर होम लोन, वाहन लोन और अन्य खुदरा कर्ज की EMI बढ़ने की संभावना रहती है।
करीब चार साल बाद बढ़ी ब्याज दर
RBI का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लगभग चार वर्षों के अंतराल के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया है। इससे संकेत मिलता है कि RBI महंगाई और अन्य आर्थिक जोखिमों को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है।
हालांकि, रेपो रेट में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्रीय बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है।
FY27 में 7.1% GDP ग्रोथ का अनुमान
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह अनुमान देश की आर्थिक गतिविधियों, घरेलू मांग और विकास की संभावनाओं को लेकर केंद्रीय बैंक के भरोसे को दर्शाता है।
RBI के मुताबिक आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों, ऊर्जा कीमतों और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो सकता है। इसका असर आगे चलकर बैंक की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
- होम लोन की EMI बढ़ सकती है।
- ऑटो और पर्सनल लोन महंगे हो सकते हैं।
- नए कर्ज लेने वालों की लागत बढ़ सकती है।
- फ्लोटिंग ब्याज दर वाले मौजूदा लोन पर भी असर संभव है।
- दूसरी ओर, बैंक FD और अन्य जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में बदलाव की संभावना बन सकती है।
बाजार की नजर अब आगे के फैसलों पर
RBI के इस फैसले के बाद बाजार और आम लोगों की नजर आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों पर रहेगी। केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है, यह महंगाई, आर्थिक विकास और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल RBI का संदेश साफ है कि आर्थिक विकास को बनाए रखते हुए महंगाई और वित्तीय स्थिरता पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
