रायपुर/जगदलपुर, 31 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों को मिली सुरक्षा व्यवस्था की अब नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद नेताओं की सुरक्षा की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद खतरे के स्तर के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।
सुरक्षा में तैनात जवानों की भी होगी समीक्षा
बस्तर में लंबे समय से नक्सली खतरे को देखते हुए कई जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं को अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में 100 से अधिक जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
सरकार अब यह देखना चाहती है कि मौजूदा परिस्थितियों में किस व्यक्ति को कितनी सुरक्षा की वास्तविक जरूरत है। समीक्षा के दौरान संबंधित क्षेत्र की स्थिति और व्यक्ति को मौजूद खतरे जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
सुरक्षा हटाने का फैसला एक साथ नहीं होगा
सुरक्षा समीक्षा का मतलब यह नहीं है कि सभी नेताओं की सुरक्षा एक साथ समाप्त कर दी जाएगी। जिन नेताओं के लिए खतरा अभी भी गंभीर पाया जाएगा, उनके सुरक्षा इंतजाम जारी रखे जा सकते हैं। वहीं जिन मामलों में खतरे का स्तर कम पाया जाएगा, वहां सुरक्षा में बदलाव संभव है।
सुरक्षा में बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल
गृह मंत्री के बयान के बाद बस्तर में नेताओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। कुछ नेताओं का कहना है कि बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियों और दौरे के दौरान अभी भी पर्याप्त सुरक्षा जरूरी है। वहीं सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि सुरक्षा का फैसला खतरे के वास्तविक आकलन के आधार पर किया जाएगा।
जवानों को दूसरी जिम्मेदारियों में लगाया जा सकता है
यदि समीक्षा के बाद कुछ नेताओं की अतिरिक्त सुरक्षा कम की जाती है, तो वहां तैनात जवानों को कानून-व्यवस्था और अन्य सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में लगाया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय सुरक्षा समीक्षा पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
