बस्तर में बाढ़ का असर जारी, राहत-बचाव अभियान तेज; 48 घंटे में NMDC ने पहुंचाईं 4 रेस्क्यू बोट

जगदलपुर, 30 सितंबर 2026। बस्तर संभाग में हालिया भारी बारिश के बाद बने बाढ़ के हालात से निपटने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। कई इलाकों में जलभराव और सड़क संपर्क प्रभावित होने के बीच प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। बीते दिनों बस्तर में बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाया गया था।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को और मजबूत करने के लिए एनएमडीसी लिमिटेड ने महज 48 घंटे में पुणे से चार रेस्क्यू स्पीड बोट मंगाकर जिला प्रशासन को सौंप दी हैं। करीब 8 से 10 लोगों की क्षमता वाली इन बोट का इस्तेमाल फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, चिकित्सा सहायता पहुंचाने और आवश्यक राहत सामग्री के परिवहन में किया जा सकेगा।

इंद्रावती के बढ़े जलस्तर ने बढ़ाई चुनौती

बाढ़ के दौरान इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा था। 29 सितंबर की रिपोर्टों में जगदलपुर में इंद्रावती का जलस्तर 12.39 मीटर तक पहुंचने और पुराने उच्चतम स्तर को पार करने की जानकारी सामने आई थी। प्रशासन ने निचले और नदी किनारे के इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ाई थी।

इससे पहले बस्तर में 43 राहत शिविरों में 5,000 से अधिक प्रभावित लोगों को ठहराए जाने की जानकारी सामने आई थी। राहत शिविरों में भोजन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ बचाव दलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया था।

सड़क संपर्क टूटने पर भी जारी रहा रेस्क्यू

बाढ़ के कारण कुछ प्रमुख मार्ग भी प्रभावित हुए। NH-30 पर बाढ़ के पानी में फंसे ट्रक चालकों और सहायकों को राहत दलों ने सुरक्षित बाहर निकाला था। वहीं डोंगाघाट क्षेत्र में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए भी निकाला गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 29 सितंबर को बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली। प्रशासन को प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने और क्षति का आकलन तेजी से करने के निर्देश दिए गए।

राहत अभियान में अब बढ़ेगी प्रशासन की क्षमता

चार नई स्पीड बोट मिलने से नगरनार, भेजापदर, करनपुर, उपनपाल और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे। प्रशासन के सामने अब प्राथमिकता फंसे लोगों तक पहुंचने, राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए रखने की है।

स्थिति: बस्तर में राहत और बचाव अभियान जारी है तथा प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी बनी हुई है।