तेलीबांधा चौक हमारी पहचान और सामाजिक विरासत है, नाम बदलने की घोषणा स्वीकार नहीं : पवन साहू

राष्ट्रीय महामंत्री साहू समाज एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा—विकास का स्वागत, लेकिन तेलीबांधा की मूल पहचान कायम रहनी चाहिए

रायपुर। राजधानी रायपुर के प्रमुख स्थलों में शामिल तेलीबांधा चौक को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित करने की घोषणा को लेकर साहू समाज की ओर से आपत्ति जताई गई है। साहू समाज के राष्ट्रीय महामंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पवन साहू ने इस घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेलीबांधा केवल एक चौक का नाम नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

पवन साहू ने कहा कि तेलीबांधा नाम रायपुर की सामाजिक और स्थानीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में इसकी मूल पहचान को बदलने का निर्णय समाज की भावनाओं को प्रभावित करने वाला है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान का विकास और सौंदर्यीकरण किया जाना स्वागत योग्य है, लेकिन इसके साथ उसकी ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान को भी संरक्षित रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “तेलीबांधा चौक हमारी पहचान और हमारी सामाजिक विरासत है। मुख्यमंत्री जी द्वारा तेलीबांधा चौक को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित करने की घोषणा का मैं विरोध करता हूं। इससे साहू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।”

विकास हो, लेकिन पहचान बरकरार रहे

पवन साहू ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध चौक के विकास या सौंदर्यीकरण से नहीं है। उनका कहना है कि विकास कार्य किए जाएं, सुविधाएं बढ़ाई जाएं और चौक को बेहतर स्वरूप दिया जाए, लेकिन तेलीबांधा नाम और उसकी पारंपरिक पहचान को बरकरार रखा जाए।

उन्होंने कहा, “हम विकास के विरोधी नहीं हैं। चौक का विकास होना चाहिए, लेकिन विकास के नाम पर तेलीबांधा की पहचान नहीं बदली जानी चाहिए। हमारी मांग स्पष्ट है कि तेलीबांधा की पहचान कायम रहे।”

समाज की भावनाओं का सम्मान करने की मांग

पवन साहू ने कहा कि ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व रखने वाले स्थानों से जुड़े फैसलों में स्थानीय समाज की भावनाओं और नागरिकों की संवेदनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि तेलीबांधा की पहचान केवल एक नाम नहीं, बल्कि उससे जुड़ी सामाजिक स्मृतियों और भावनाओं का हिस्सा है। इसलिए समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए तेलीबांधा चौक का मूल नाम कायम रखा जाना चाहिए।