तेल की बढ़ती कीमतों और RBI के नए मसौदे से वित्तीय बाजारों में हलचल

नई दिल्ली, 22 जुलाई वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर बुधवार को भारतीय वित्तीय बाजार पर भी देखने को मिला. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है. इसका असर शेयर बाजार और रुपये दोनों पर दिखाई दिया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में रहे, जबकि रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो इसका असर आम लोगों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है.

इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेश से जुड़े नियमों को अधिक सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से नया मसौदा जारी किया है. प्रस्तावित नियमों में विदेशी निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ कंपनियों में विदेशी नियंत्रण की स्पष्ट परिभाषा तय करने का प्रयास किया गया है. इसके अलावा विदेशों में धन भेजने और निवेश से जुड़े कुछ प्रावधानों में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है. RBI ने इन मसौदा नियमों पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद अंतिम नियम लागू किए जाएंगे.

वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से भारतीय शेयर बाजार में दोबारा निवेश बढ़ने के संकेत भी मिले हैं. हाल के दिनों में उन्होंने चुनिंदा क्षेत्रों, विशेषकर वित्तीय सेवाओं, उपभोक्ता सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र की कंपनियों में निवेश बढ़ाया है. इससे बाजार को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है, हालांकि वैश्विक परिस्थितियों और तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के रुझान और RBI के नीतिगत फैसलों पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी. फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहते हुए वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है.