रायपुर, 24 सितंबर 2026: विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के थाड़पथरा में ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन को समझने के लिए विशेष फील्ड विजिट और वर्कशॉप आयोजित की गई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग के 90 विद्यार्थियों ने इसमें हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का आयोजन 21 से 27 सितंबर तक चल रहे विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत किया गया। विद्यार्थियों ने थाड़पथरा के प्राकृतिक वातावरण, स्थानीय संस्कृति और समुदाय आधारित पर्यटन की संभावनाओं को करीब से समझा।
जंगल से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग
फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक क्षेत्र से होते हुए कमरापथरा मार्ग तक ट्रैकिंग की। इसके बाद वे ‘माई का मंडप’ पहुंचे।
इस दौरान विद्यार्थियों ने समझा कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय विरासत को संरक्षित रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को किस तरह विकसित किया जा सकता है।
करीब से जानी बैगा संस्कृति
विद्यार्थियों ने बैगा जनजाति की जीवनशैली, खान-पान, रहन-सहन और गोदना परंपरा के बारे में जानकारी ली। स्थानीय समुदाय के साथ संवाद के दौरान उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि जनजातीय पर्यटन केवल प्राकृतिक स्थलों के भ्रमण तक सीमित नहीं है।
स्थानीय परंपराओं, लोकजीवन, खान-पान, कला और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़कर पर्यटकों के लिए अलग तरह का अनुभव तैयार किया जा सकता है।
स्थानीय व्यंजनों का भी लिया अनुभव
थाड़पथरा पर्यटन समिति ने विद्यार्थियों का स्वागत किया और उन्हें क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने स्थानीय भोजन और ग्रामीण जीवनशैली को भी करीब से जाना।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों की भागीदारी से विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन की भूमिका समझने का अवसर मिला। इसमें स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने समझाया समुदाय आधारित पर्यटन
पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक अभिषेक जायसवाल और पर्यटन समन्वयक हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन को विकसित करने में स्थानीय समुदाय की भागीदारी अहम है। इससे स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन की पढ़ाई को मिला जमीनी अनुभव
थाड़पथरा का यह दौरा विद्यार्थियों के लिए पर्यटन प्रबंधन की पढ़ाई को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर बना। प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय के साथ सीधे संवाद के जरिए विद्यार्थियों ने जिम्मेदार और समुदाय आधारित पर्यटन की अवधारणा को व्यावहारिक रूप से समझा।
कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. रोहित रविंद्र बोरलिकर, डॉ. जयप्रकाश नारायना और डॉ. दिनेश कुमार परस्ते के मार्गदर्शन में किया गया। थाड़पथरा पर्यटन समिति के सदस्यों ने भी आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया।
