लद्दाख, 30 अगस्त 2026। लद्दाख के नुन-कुन क्षेत्र में भारतीय सेना ने शनिवार को बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच एक घायल जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) को सुरक्षित निकालने के लिए हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। करीब 18,600 फीट की ऊंचाई पर किए गए इस अभियान में सेना के एविएशन पायलटों को तेज हवाओं, खड़ी पहाड़ी ढलान और बेहद सीमित लैंडिंग स्पेस जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
आखिर क्यों करना पड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन?
नुन-कुन क्षेत्र में सेना का एक JCO गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी स्थिति ऐसी थी कि उसे जमीन के रास्ते नीचे लाना बेहद मुश्किल था। उसकी जान बचाने के लिए तत्काल मेडिकल इवैक्युएशन की जरूरत थी।
घायल JCO जिस स्थान पर था, वहां ऊंचाई लगभग 18,600 फीट थी। इलाके में पहाड़ी ढलान बेहद खड़ी थी और हेलिकॉप्टर को सामान्य तरीके से उतारने के लिए पर्याप्त समतल जगह उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में सेना के सामने चुनौती थी कि बिना समय गंवाए घायल जवान को वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाया जाए।
खतरनाक ढलान पर नहीं उतर सका हेलिकॉप्टर
रेस्क्यू के दौरान सबसे बड़ी चुनौती हेलिकॉप्टर की लैंडिंग को लेकर थी। पहाड़ी का ढलान इतना खड़ा था कि सामान्य लैंडिंग संभव नहीं थी। इसके अलावा ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने के कारण हेलिकॉप्टर की लिफ्ट क्षमता भी प्रभावित होती है।
ऐसे हालात में सेना के पायलटों ने बेहद सटीक उड़ान कौशल का इस्तेमाल किया। हेलिकॉप्टर को ढलान के बेहद करीब स्थिर रखते हुए एक स्किड को पहाड़ी पर टिकाया गया, जबकि हेलिकॉप्टर का दूसरा हिस्सा हवा में रहा। इसी स्थिति में घायल JCO को हेलिकॉप्टर तक पहुंचाकर एयरलिफ्ट किया गया।
कम ऑक्सीजन और तेज हवाओं के बीच मिशन
करीब 18,600 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है और मौसम तेजी से बदल सकता है। तेज हवाओं के कारण हेलिकॉप्टर को स्थिर रखना भी बेहद चुनौतीपूर्ण था।
मिशन को सफल बनाने के लिए हेलिकॉप्टर का वजन कम किया गया। गैर-जरूरी सामान हटाया गया और ईंधन की मात्रा भी ऑपरेशन की जरूरत के हिसाब से रखी गई। इसके साथ ही दिन की रोशनी खत्म होने से पहले रेस्क्यू पूरा करना भी जरूरी था।
अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन नहीं बच सकी जान
सेना के पायलटों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद घायल JCO को वहां से निकाल लिया और उसे कारगिल स्थित सेना के अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान JCO की मौत हो गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सामने आई मुश्किल परिस्थितियां बताती हैं कि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में मेडिकल इवैक्युएशन कितना चुनौतीपूर्ण होता है। सेना के एविएशन पायलटों ने सीमित लैंडिंग स्पेस और कठिन मौसम के बावजूद घायल जवान को निकालने के लिए असाधारण उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया।
🇮🇳 सेना के साहस और कौशल की मिसाल
18,600 फीट की ऊंचाई पर किया गया यह ऑपरेशन भारतीय सेना की हाई-एल्टीट्यूड एविएशन और मेडिकल इवैक्युएशन क्षमता का उदाहरण है। बेहद दुर्गम इलाके में सीमित समय और कठिन मौसम के बीच पायलटों ने जिस तरह ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह सेना के प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता को दर्शाता है।
