नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान चुनावी सूची से जुड़े कथित तौर पर एकतरफा फैसलों की जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को अवैध घोषित करने की मांग की है। साथ ही CEC ज्ञानेश कुमार सहित कुछ अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग रखी गई है।
13 करोड़ नामों को लेकर भी जांच की मांग
याचिका में SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे की जांच के लिए SIT या न्यायिक जांच की मांग भी की गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में यह संख्या ड्राफ्ट रोल से हटाए गए नामों से जुड़ी है; इसे सीधे तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं का स्थायी रूप से मताधिकार खत्म होना नहीं माना जाना चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
यह याचिका The Indian Express की उस रिपोर्ट के बाद सामने आई है, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनावी सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और Form 6 से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और निर्णय सर्वसम्मत थे।
मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।
