मिनीमाता बांगो डिवीजन, कटघोरा एवं आईजीकेबी के मध्य एमओयू 

शपुर के बगिया क्षेत्र में कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा प्रदान करने में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर एवं मिनीमाता बांगो डिवीजन, माचाडोली, कटघोरा के मध्य फार्मर रिलेशनशिप एजेंसी निर्धारण हेतु आज यहां एक समझौता (एमओयू) किए गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल की उपस्थिति में संपन्न समझौता ज्ञापन पर श्री अखिलेश साहू, कार्यपालन अभियंता, मिनीमाता बांगो डिवीजन, कटघोरा एवं डॉ. एस. एस. टुटेजा, निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी  कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जशपुर के बगिया क्षेत्र के किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए उनकी आय वृद्धि, कृषि उत्पादन में सुधार एवं ग्रामीण कृषि व्यापार को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत मिनीमाता बांगो बांध के कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 13 गांवों में विभिन्न कृषि विकास गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इन गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र, जशपुर को नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजना के माध्यम से किसानों के खेतों का मृदा परीक्षण, फसल एवं वर्तमान कृषि स्थिति का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा। साथ ही किसानों एवं ग्रामीण समुदाय के मध्य परियोजना संबंधी जागरूकता निर्माण हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किसानों के खेतों में वैज्ञानिक पद्धति से फसल प्रदर्शन कर आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जाएगा ताकि किसान नवीन तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। कृषकों को उन्नत कृषि आदान सामग्री जैसे उन्नत बीज, जैव उर्वरक एवं अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उद्यानिकी फसलों की उन्नत तकनीकों के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों हेतु उन्नत बीज, जैव उर्वरक एवं कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराए जाएंगे। परियोजना का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि प्रणाली से जोड़ना है।

इस परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं एवं पानी कृषि मित्रों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे उन्हें कृषि आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। किसानों के लिए समय-समय पर प्रक्षेत्र दिवसों का आयोजन किया जाएगा, जहां विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण एवं बाजारोन्मुख खेती की जानकारी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे किसान संगठित होकर बाजार आधारित कृषि व्यापार को बढ़ावा दे सकें। परियोजना के माध्यम से किसानों को विपणन, मूल्य संवर्धन एवं कृषि उत्पादों के बेहतर बाजार उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाएगा। ग्रामीण कृषि व्यापार को प्रोत्साहन देने तथा किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी। इस अवसर पर डॉ. विवेक त्रिपाठी, संचालक अनुसंधान सेवाएं, डॉ. कपिल देव दीपक, कुलसचिव तथा डॉ. राकेश भगत, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, जशपुर उपस्थित थे।

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