किराये के भवन से शुरू हुआ सफर अब प्राइवेट लिमिटेड की ओर; शासन की औद्योगिक नीति ने दी उड़ान

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज उन महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है।

अम्बिकापुर की श्रीमती पूनम जायसवाल ऐसी ही एक प्रेरणापुंज हैं, जिन्होंने न केवल अपनी पारिवारिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि आज 20 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर ’नारी सशक्तिकरण’ के संकल्प को धरातल पर उतारा है।
संघर्ष से सफलता तकः निजी संसाधनों से रखी नींव

श्रीमती पूनम जायसवाल ने बताया कि उनके उद्यमिता के सफर की शुरुआत वर्ष 2000 में एक छोटे से किराये के भवन और सीमित निजी संसाधनों से हुई थी। आर्थिक चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ। वर्ष 2013-14 में छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों के फलस्वरूप उन्हें 99 वर्ष की लीज पर औद्योगिक भूमि प्राप्त हुई। बैंक से ऋण लेकर उन्होंने अपने कार्य को गति दी और आज उनका यह लघु उद्योग एक सफल इकाई के रूप में स्थापित हो चुका है।
20 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार

श्रीमती पूनम का उद्देश्य केवल स्वयं का विकास नहीं, बल्कि समाज की जरूरतमंद महिलाओं को साथ लेकर चलना रहा है। उन्होंने बताया कि, मेरे उद्योग में आज 20-22 बहनें कार्य कर रही हैं, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से कर पा रही हैं।“ अब उनका लक्ष्य अपने इस उद्यम को ’प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी के रूप में विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक महिला उद्यमियों को जोड़ा जा सके।

अपनी सफलता का श्रेय छत्तीसगढ़ शासन और जिला उद्योग केंद्र को देते हुए श्रीमती जायसवाल ने कहा कि शासन द्वारा प्रदान की गई भूमि और समय-समय पर मिले मार्गदर्शन ने उनके मार्ग को प्रशस्त किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की ’नई उद्योग नीति’ की सराहना करते हुए कहा कि लागत पूँजी पर मिलने वाले प्रोत्साहन और सब्सिडी के कारण महिलाओं के लिए उद्यमिता के द्वार खुले हैं।
आधी आबादी की शक्ति से बढ़ेगा देश

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि, “देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या महिलाओं की है। जब महिलाएँ आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनेंगी, तभी देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री जी के ’विकसित भारत’ के विजन और छत्तीसगढ़ शासन के ’रोजगार प्रोत्साहन’ कार्यक्रमों को महिला सशक्तिकरण का मुख्य आधार बताया। श्रीमती पूनम अन्य महिलाओं से अपील की कि वे शासन की योजनाओं, सब्सिडी और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाकर स्वयं उद्यमी बनें।

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